नमस्कार दोस्तों, जेसा कीआप सभी जानते है की भारत सरकार ने Chinese app को ban कर दिया है जिसके बाद से हम Zoom Meeting, Tiktok, Likee, Helo जेसे app को उपयोग नहीं कर पाएंगे. अब ऐसे में सवाल यह उठता है की India का online meeting app कोनसा है तो मैं आपको बताना चाहता हु Jio Meeting app है जिसकी मदद से हम अपनी online meeting शुरू कर सकते है.

Reliance Jio ने कुछ दिनों पहले अपना एक Online meeting एप्लीकेशन लांच किया है जो की Play store पर available है जिसे लोगो द्वारा बहुत पसंद किया जा रहा है इसे Zoom का alternative माना जा रहा है जो की इसे टक्कर देगा.
JioMeet-App-Download-Use-kaise-kare?
अब आपके मन में यह सवाल उठ रहा होगा की Jio Meet कैसे download करे, Jio meet पर meeting कैसे स्टार्ट करे, जिओमीट पर meeting कैसे schedule करे यानि की Jio meet app use कैसे करे कि पूरी जानकारी देने वाला हु.

Jio Meet Download Kaise Kare?

अपने एंड्राइड मोबाइल में JioMeet उपयोग करने के लिए सबसे पहले आपको Jio Meet App को download करना होगा. इसके लिए अपने मोबाइल के Play store में जाये और Jio meet सर्च करके इस app को डाउनलोड कर लीजिये.

Download :- Jio Meet

आप चाहे तो हमारी ऊपर दी गयी लिंक से डायरेक्ट Jio meet download कर सकते है.

Jio Meet use कैसे करे ?

इस app को डाउनलोड करने के बाद आपको इसे open कर लेना और Sign up के बटन को क्लिक करके Jio meet पर अपना account बना लेना है. अकाउंट बनाने के लिए आप मोबाइल नंबर या Email ID का उपयोग कर सकते है.

आपके द्वारा डालीगए नंबर या email पर एक वेरिफिकेशन लिंक मिलेगी उसे open करके अपना अकाउंट वेरीफाई कर लीजिये और फिर अपने meet अकाउंट के लिए password set कर लीजिये. इसके बाद अपनी Jio meeting शुरू करने के लिए आप निचे दी गयी विडियो को देख सकते है. जहा पर आपको Jio Meeting app use करना डिटेल से सिखाया है.

Jio Meet से Meeting कैसे Create & Join करे?

Jio meet में meeting create करने के लिए आपको Start का बटन दिखेगा इस पर क्लिक कर दीजिये और फिर कुछ ही सेकंड में meeting create हो जाएगी. अब जिस भी व्यक्ति को आप meeting में ज्वाइन करवाना चाहते है Participants सेक्शन में जाकर अपनी meeting URL और Password share कर दीजिये.

Meeting Join कैसे करे?

जिस भी व्यक्ति को meeting को ज्वाइन करना है उसे अपने मोबाइल में पहले से ही Jio meeting app को डाउनलोड करना होगा और फिर receive हुयी email पर क्लिक करके ज्वाइन करना होगा. Link पर क्लिक करने के बाद आपको meeting password इंटर करना होगा जो कि लिंक के साथ में आया होगा. उसके बाद आप meeting में join हो जायेंगे. तो इस तरीके से आप बड़े ही आसानी से JioMeet app use & डाउनलोड कर सकते है.

C++ Programming Basics :- C++ हाई परफॉरमेंस एप्लीकेशन जैसे कि वेब सर्वर्स, OS, गेम इंजन्स में use होता है| यह हम पुराने C++03 के बेसिक्स से लेकर नये C++11 के कम्पोनेन्ट्स के बारे में जानेंगे|
learn-c++-basics-in-hindi

 C++ Programming कैसे सीखे

उदाहरण के तौर पर हम दो नं जोड़ने और रिजल्ट प्रिंट करने का छोटा सा प्रोग्राम देखंगे –
//This line is necessary to be able to output information to the screen #include //The program starts here and carries on line by line int main ()
{
//create two integers a and b containing 10 and 5
Int a=10;
Int b=5;
/*Add them together and store the result in another integer called sum */
Int sum=a + b;
// output the sum to the screen
Std::count <//End the program and send a value of 0 (success) back
//to the operating system
Return 0;
}
प्रोग्राम को एक file में save करंगे (नाम tutorial.cpp) और रन करने से पहले कम्पाइलर से कम्पाईल करेंगे| कम्पाईलेशन वह प्रोसेस है जो प्रोग्रामर के कोड को एक एक्सिक्यूटेबल फाइल में कन्वर्ट करता है, जिसे कंप्यूटर रन कर सकता है|
कम्पाईलेशन के बाद कमांड प्रांप्ट टर्मिनल विंडो खोल कर प्रोग्राम को रन किया जाता है| (and eye विंडोज में)
>$ example-program
15
       अब को समझते है|
        //, प्रोग्राम में कम्पाइलर द्वारा ignore की जाती है, यह लाइन्स उन कमेंट्स को add करने में काम आती है, जो कोड ‘/*’ एवम् ‘*/’ के बीच भी लिखा जायेगा वह ‘कमेंट्स’ कहलायेगा, इन कमेंट्स का प्रोग्राम पर कोई असर नही पड़ता|

पहली नॉन-कमेन्ट लाइन include directive है, जो कम्पाइलर को यह बताती है की कहा से कोड यूज करना है| इस केस में हम एक standard library, iostream से कोड यूज करेंगे , जो आउटपुट स्क्रीन पर टेक्स्ट दिखाती है|

Standard library C++ कोड फाइल्स (हेडर्स) का कलेक्शन है, जो कोई भी प्रोग्रामर अपने कोड में यूज कर सकता है| जो फ़ाइल यह यूज हो रही है, वो I/O streams को मैनिपुलेट करने और यूजर तक आउटपुट पहुँचाने में कम आती है (.hpp फाइल एक्सेटशन int main) हर C++ प्रोग्राम में होना जरूरी है| इससे कम्पाइलर को पता चलता है कि प्रोग्राम कहाँ से शुरू होता है| आप प्रोग्राम से जो भी करवाना चाहते है, वो कोड के फॉर्म में ‘{ }’ के बीच लिखा जायेगा|

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OOP (आब्जेक्ट-ओरिएंटेड प्रोग्रामिंग), प्रोग्रामिंग की एक भिन्न एप्रोच है | इसे प्रोग्रामर की प्रोडक्टिवटी को बढ़ाने के लिए बनाया गया है व इसके द्वारा प्रोसेजरल प्रोग्रामिंग एप्रोच की कमीयो को दूर किया गया है| अब तक बहुत सी आब्जेक्ट-ओरिएंटेड प्रोग्रामिंग लैंग्वेज जैसे c++ व smaltalk आ चुकी है व मार्केट में बहुत प्रचलित हो गयी है | इन लैंग्वेज को डेवेलप करने का मुख्य उद्देश्य प्रोग्राम के बढ़ते साइज़ व काम्प्लेक्सिटी को मैनेज करना होता है | पिछली पोस्ट में हमने Oops के बारे में जाना था और आज हम Oops के concept in Hindi में जानने वाले है.
OOPS बेसिक कन्सेप्ट
आब्जेक्ट ओरिएंटेड प्रोग्रामिंग में उपयोग होने वाले बेसिक कन्सेप्ट निम्न है-
OOP-Concept-in-Hindi-Complete-Detail

1.आब्जेक्ट

यह ऐसे पर्सन, बैंक अकाउंट या किसी आइटम को दर्शाता है जिसे प्रोग्राम द्वारा सम्भाला जाता है | जब प्रोग्राम execute होता है तब आब्जेक्ट एक दुसरे से मेसेज sending द्वारा इंटरेक्ट करते है| उदाहरण के लिए , यदि प्रोग्राम में ‘कस्टमर’ व ‘अकाउंट’ दो आब्जेक्ट है तो कस्टमर आब्जेक्ट ,अकाउंट आब्जेक्ट को बैंक बैलेंस के लिए मेसेज भेज सकता है |
 OOPs Concept kya hai?
प्रत्येक आब्जेक्ट में डाटा को मेनुपुलेट करने के लिए डाटा व कोड शामिल होते है | आब्जेक्ट्स एक दुसरे के डाटा या कोड की इनफार्मेशन जाने बिना इंटरेक्ट करते है | यह जानना बहुत होता है कि एक्सेप्टेड मेसेज का प्रकार व आब्जेक्ट द्वारा लोटाये गये रिस्पांस का प्रकार क्या है |

2.क्लासेस

आब्जेक्ट में डाटा को मेनुपुलेट करने के लिए डाटा व फंक्शन या कोड शामिल होते है | आब्जेक्ट के डाटा व कोड का सम्पूर्ण समूह, क्लास की मदद से यूजर-डिफाइंड डाटा टाइप बनाते है | ये आब्जेक्ट टाइप क्लास के वेरिएबल होते है|

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एक बार क्लास को परिभाषित करने के बाद हम इस क्लास से एसोसिएट कितने भी आब्जेक्ट बना सकते है| उदाहरण के लिए, mango, apple व orange, क्लास फ्रूट के सदस्य है | यदि फ्रूट को क्लास की तरह परिभाषित करते है तो स्टेटमेंट फ्रूट मेंगो, क्लास फ्रूट का मेंगो आब्जेक्ट बनाता है |

3. डाटा एस्बट्रैक्शन

एस्बट्रैक्शन बिना बैकग्राउंड की जानकारी बताये कुछ महत्वपूर्ण विशेषताओ को दर्शाता है | इस कांसेप्ट को समझने के लिए हम ‘switchboard’ का उदाहरण लेते है | आप केवल आपकी आवश्यकता अनुसार कुछ निश्चित switches को प्रेस  कर सकते है | आपको इन switches की इंटरनल वर्किंग जानने के लिए आवश्यकता नही है | इसके अंदर क्या होता है, यह आपसे छुपा रहता है| यह एस्बट्रैक्शन है जहा आप switch board की background की जानकारी जाने बिना switch board की कुछ चीजो को ऑपरेट कर सकते है |

4.डाटा इन्केप्सुलेशन

इन्केप्सुलेशन, OOP का बहुत बेसिक कंसेप्ट है| यह डाटा व फंक्शन दोनों को जोड़ने का तरीका है जो एक सिंगल यूनिट में डाटा को ऑपरेट करता है | केवल फंक्शन द्वारा डाटा को एक्सेस किया जा सकता है| यह फंक्शन डाटा के साथ जुड़े रहते है | ये c++ में member फंक्शन की तरह होते है | डाटा को सीधे एक्सेस करना सम्भव नही होता है|
 OOP Concept
यदि आप आब्जेक्ट में डाटा आइटम  तक पहुचना चाहते है तो आप आब्जेक्ट में memberफंक्शन  को कॉल कर सकते है| यह डाटा आइटम  को पढ़ता है | व मान को आप तक पहुचाता है | यह डाटा छुपा रहता है, इसलिये यह सुरक्षित व एक्सीडेंटल अल्टरनेशन से दूर रहता है| डाटा व इसके फंक्शन एक सिंगल entity में इन्केप्सुलेटेड होते है |

5. मोड्युलेरीटी

प्रोग्राम को अलग-अलग कम्पोनेंट में विभाजित करना मोड्युलेरीटी कहलाता है | यह निम्न फायदे देता है –
  • यह कुछ हद तक कोम्प्लेक्सिटी को कम करता है |
  • यह प्रोग्राम में बहुत सी सु-परिभाषित डॉक्यूमेंटेड बाउंड्री बनाता है |
मोड्यूल स्वयं में एक अलग यूनिट है | इसे independently कंपाइल किया जाता है ,इसलिए इसे अन्य मोड्यूल के साथ लिंक किया जा सकता है | मोड्यूल, प्रोग्राम के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कार्य किया करता है |

6. Inheritance

यह existing class में नई class को परिभाषित करने की क्षमता  प्रदान करता है | इस existing class को base class व नई class को derived-class कहते है| इस पर बहुत से उदाहरण दिये गये है | उदाहरण के लिए , मोटरसाइकिल स्वयं में एक class है | यह two wheelers class की सदस्य भी है | two wheeler class, automotive class की सदस्य है | automotive, base class का उदाहरण है व two wheelers इसकी derived classहै |
 OOPs concept in hindi
आसान शब्दों में, हम यह कह सकते है की motorcycle एक two wheeler automotive है | c++ इस प्रकार  के classes की हिएरार्चिकल क्लासिफिकेशन को  सपोर्ट करता है | inheritance का मुख्य लाभ यह है की  हम generic base class भी बना सकते है अत: मौजूद क्लास  में कुछ नई विशेषताये जोड़ नई क्लास  को प्राप्त कर सकते है| प्रत्येक  नई  class में  दोनों classes की विशेषताये होती है | inheritance मौजूद class को अनुमति देती है की नई एप्लीकेशन  को बिना मॉडिफिकेशन करे अपनाती है |

7. पोलिमार्फिज्म

Oop के पॉवर की एक key है| यह वह concept  है जो  डाटा को एक से अधिक फॉर्म में प्रोसेस्ड होने की  क्षमता प्रदान करती है | उदाहरण के लिए, एक  ऑपरेशन अलग-अलग instances में अलग-अलग व्यवहार कर सकता है| इसका behaviour, आपरेशन में उपयोग होने वाले डाटा के प्रकार पर निर्भर  करता है | हम addition का आपरेशन लेते है | दो संख्याओ के लिए यह आपरेशन sum generate करता है | यदि operands, स्ट्रिंग होते है तो आपरेशन, concatenation द्वारा तीसरी स्ट्रिंग बनाता है |
OOP, प्रोग्राम डिज़ाइनर व यूजर दोनों को बहुत से लाभ प्रदान करता है| ऑब्जेक्ट ओरिएंटेड अप्रोच, सॉफ्टवेर development व सॉफ्टवेर प्रोडक्ट से सम्बन्धित बहुत सी प्रॉब्लम को हल करने में मदद करता है| ये नई technology, अधिक प्रोग्रामर प्रोडक्टिविटी, सॉफ्टवेर की बेहतर quality व कम maintenance cost प्रदान करती है|
इसके मुख्य लाभ निम्न है-
  • सॉफ्टवेर कोम्प्लेक्सिटी को आसानी से मैनेज करता है |
  • ऑब्जेक्ट-ओरिएंटेड सिस्टम को आसानी से अपग्रेड करता है|
  •  यह ऑब्जेक्ट पर आधारित प्रोजेक्ट में कार्य को बाँटने  में आसान बनाता है |
आशा करता हु कि आपको Oops concept in Hindi समझ में आ गया होगा.

दोस्तों आज की इस पोस्ट में Network interface card (NIC) के बारे में बताने वाले है जो की कंप्यूटर में इन्टरनेट एक्सेस करने के लिए बहुत ही जरुरी है.
Network-Interface-Card-in-hindi

Network Interface Card in Hindi

एक नेटवर्क इंटरफ़ेस कार्ड (NIC), एक कंप्यूटर हार्डवेयर अवयव है जो किसी कंप्यूटर को नेटवर्क जैसे घरेलू नेटवर्क या इन्टरनेट से जोड़ने हेतु प्रयोग किया जाता है| NIC होस्ट से नेटवर्क पर आदान प्रदान हेतु डेटा निर्मित करने, भेजने, प्राप्त करने और प्रोसेस करने का कार्य NIC का प्रयोग वायर या वायरलेस दोनों प्रकार के connection में किया जाता है| NIC को इथरनेट कार्ड या नेटवर्क एडाप्टर  के नाम से भी जाना जाता है| अधिकतर कंप्यूटर में नेटवर्क कार्ड मदर बोर्ड का हिस्सा होती है|
प्रत्येक NIC का अपना एक 8 बाइटस का विशिष्ट MAC (मिडिया एक्सेस कंट्रोल) एड्रेस होता है| इसे फिजिकल एड्रेस  भी कहते है| NIC में आने तथा जाने वाले डेटा पैकेट्स  की बफरिंग के लिए अतिरिक्त मेमोरी होती है इससे नेटवर्क की क्षमता में व्रद्धिहोती है|

Object ओरिएंटेड Programming एक प्रोग्रामिंग लैंग्वेज है जिसका नमूना ऑब्जेक्ट Object और Data के अनुसार आयोजित है बजाय कि Action और Logic के. पहले प्रोग्राम को एक लॉजिकल प्रोसीजर के रूप में देखा जाता था. जो इनपुट डाटा लेता है उसे process करता है और आउटपुट produce करता है.
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Programing चैलेंज होता था की कैसे लिखे, ना की डाटा को कैसे परिभाषित करे. OOP ऑब्जेक्ट्स जिन्हें मेनीपुलेट करना है उन पर ध्यान देता है ना की उस लॉजिक पर, जिससे उन्हें  मेनीपुलेट किया जाने वाला है. ऑब्जेक्ट्स के उदाहरण की रेंज इंसानों (नाम, पता से वर्णित) से लेकर इमारतों और जमीन तथा कंप्यूटर desktop के छोटे-छोटे widgets (बटन्स, स्क्रॉल बार) तक फेली है.

What is OOP in Hindi?

OOP की पहली स्टेप है सभी ऑब्जेक्ट्स को पहचानना, जिन्हें प्रोग्रामर मेनीपुलेट करना चाहता है और उन्हें बीच का रिलेशन पता करना, इस  exercise को अक्सर "Data Modeling" कहा जाता है, एक बार ऑब्जेक्ट की पहचान जो जाये तो उसे इन ऑब्जेक्ट्स की क्लास में generalized कर दिया जाता है, जो यह बताती है की उस क्लास में किस तरह के डाटा है और कैसी लॉजिकल sequence उन डाटा को मेनीपुलेटकर सकती है. 

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हर अलग लॉजिकल sequence को method कहा जाता है. ऑब्जेक्ट्स जिस इंटरफ़ेस की मदद से एक दुसरे से कम्यूनिकेट करते है उसे message कहते है.

जो concept और rules OOP में इस्तेमाल किये जाते है उनसे निम्नलिखित फायदे है-
  • Data क्लास का concept, Data ऑब्जेक्ट की subclass, जो मेन क्लास के characteristics शेयर करती है, उन्हें डिफाइन करने में काम आता है.
  • चूँकि क्लास सिर्फ डाटा को डिफाइन करती है, इसलिए जब उस क्लास के किसी instance (ऑब्जेक्ट) को रन किया जाता है तो code कभी भी गलती से किसी अन्य प्रोग्राम डाटा को एक्सेस नहीं कर पायेगा.
  • किसी भी क्लास की डेफिनिशन दुसरे OOP के लिए reuse की जा सकती है.
  • प्रोग्रामर को एक नया डाटा टाइप create करने की आजादी है, जो मोजुदा लैंग्वेज में नहीं है.
 आशा करता हु कि इस लेख को पढने के बाद में OOP in Hindi में समझ आ गया होगा. अगले लेख में हम OOP का Concept लिखने वाले है. जिसे जरुर पढ़े ताकि आपको OOP की पूरी जानकारी मिल सके.